खेतों में नरवाई जलाने पर होगी कार्रवाई : कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल

किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि पर्यावरण सुरक्षा को देखते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्युनल के निर्देशों के अंतर्गत प्रदेश में फसलों विशेषतः धान एवं गेंहूँ की फसल कटाई उपरांत फसल अवशेषों (नरवाई) को खेतों में जलाये जाने को प्रतिबंधित किया गया है। इस संबंध में जारी निर्देशों के उल्लंघन किये जाने पर संबंधितों के विरूद्ध कार्रवाई की जाएगी। पर्यावरण विभाग द्वारा नरवाई में आग लगाने के विरूद्ध पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि दण्ड का प्रावधान निर्धारित किया गया है।

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अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यक व्यवस्था बनाकर बेहतर पर्यावरण जन स्वास्थ्य एवं जीव-जन्तुओं की जीवन सुरक्षा प्राथमिकता से करना सुनिश्चित करें। ऐसा कोई व्यक्ति/निकाय/ कृषक जिसके पास 2 एकड़ तक की भूमि है तो उसको नरवाई जलाने पर पर्यावरण क्षति के रूप में 2500 रुपये, 2 से 5 एकड़ तक की भूमि है तो 5 हजार रुपये और 5 एकड़ से अधिक भूमि है तो उसको नरवाई जलाने पर पर्यावरण क्षति के रूप में 15 हजार रुपये प्रति घटना के मान से आर्थिक दण्ड भरना होगा।

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दण्ड वसूलने के लिये संबंधित व्यक्ति/निकाय/कृषक जिनके द्वारा नरवाई जलाकर पर्यावरण को क्षति पहुँचाई गई है, को उप संचालक कृषि सूचना-पत्र जारी करेंगे। सूचना-पत्र को तामिल कराने की जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के कृषि विस्तार अधिकारी की होगी। संबंधित क्षेत्र के वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी इसका पर्यवेक्षण करेंगे एवं तामिल किए गए सूचना पत्रों की सूची अनुविभागीय कृषि अधिकारी उप संचालक कृषि को प्रस्तुत करेंगे।

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कृषि विस्तार अधिकारी, संबंधित ग्राम के हल्का पटवारी एवं पंचायत सचिव के साथ समन्वय बनाकर कार्य करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित थाने से पुलिस बल भी साथ में लिया जा सकता है।

आदेश में कहा गया है कि नरवाई जलाने से किसानों को रोकने की जिम्मेदारी कृषि विभाग की है। भारत सरकार की संस्था आईसीएआर-क्रीम्स द्वारा देश में नरवाई में आग लगाने की मॉनिटरिंग सैटेलाईट के माध्यम से की जा रही है।

 

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